भारतीय कृषि देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और यह हमारे समाज का महत्वपूर्ण हिस्सा है। भारत की लगभग 70% जनसंख्या कृषि पर निर्भर है, और यह देश की जीडीपी का एक बड़ा हिस्सा भी योगदान करती है। कृषि न केवल भोजन का मुख्य स्रोत है, बल्कि यह कच्चे माल, रोजगार और आर्थिक विकास का भी स्रोत है।
इस लेख में “Bihar Board Class 8th Hamari Duniya Chapter 2 Notes” के तहत भारतीय कृषि के प्रमुख बिंदुओं को विस्तार से समझाया गया है। यह न केवल परीक्षा की तैयारी में सहायक होगा, बल्कि छात्रों को भारतीय कृषि की वर्तमान स्थिति और उसके सुधार के उपायों के प्रति जागरूक करेगा।
Bihar board class 8th hamari duniya chapter 2 notes-भारतीय कृषि
भारतीय कृषि की विशेषताएं:- भारत की कृषि विविधतापूर्ण है, क्योंकि यहां की जलवायु, मिट्टी, और भौगोलिक विविधता के कारण विभिन्न प्रकार की फसलें उगाई जाती हैं। भारतीय कृषि की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:
मौसमी कृषि (Seasonal Agriculture): भारत में कृषि मुख्यतः वर्षा पर निर्भर करती है। यहां तीन प्रमुख फसलें उगाई जाती हैं – खरीफ, रबी और जायद।
- खरीफ फसलें: ये फसलें मानसून के दौरान जून से सितंबर के बीच उगाई जाती हैं, जैसे धान, मक्का, ज्वार, बाजरा, कपास, सोयाबीन, मूंगफली आदि।
- रबी फसलें: ये फसलें शीतकाल के दौरान अक्टूबर से मार्च के बीच उगाई जाती हैं, जैसे गेहूं, चना, सरसों, मटर आदि।
- जायद फसलें: ये फसलें गर्मियों में मार्च से जून के बीच उगाई जाती हैं, जैसे तरबूज, ककड़ी, मक्का आदि।
कृषि का मिश्रित स्वरूप (Mixed Farming): भारतीय किसान एक साथ कई प्रकार की फसलें उगाते हैं और पशुपालन भी करते हैं। इस प्रकार की खेती को मिश्रित खेती कहते हैं। इससे किसान अपनी आय को बढ़ाने में सक्षम होते हैं और जोखिम कम होता है।
- सिंचाई पर निर्भरता (Dependence on Irrigation): भारत की कृषि का बड़ा हिस्सा अब भी वर्षा पर निर्भर है। हालांकि, सिंचाई सुविधाओं में सुधार के साथ, अब कई क्षेत्रों में नहरें, ट्यूबवेल, और तालाब जैसे सिंचाई साधनों का उपयोग किया जा रहा है।
- जीविका कृषि (Subsistence Farming): अधिकांश भारतीय किसान अपने परिवार की जीविका के लिए खेती करते हैं। वे अपने उपज का एक बड़ा हिस्सा खुद उपभोग करते हैं और शेष बाजार में बेचते हैं।
- कमजोर तकनीक (Low Technological Input): कई किसानों के पास उन्नत तकनीक और मशीनों का अभाव है। इसके परिणामस्वरूप, वे पारंपरिक तरीकों से खेती करते हैं, जिससे उत्पादन की मात्रा और गुणवत्ता प्रभावित होती है।
भारतीय कृषि के प्रमुख उत्पाद:- भारत की विविध जलवायु और भौगोलिक स्थिति के कारण यहां विभिन्न प्रकार की फसलें उगाई जाती हैं। यहां कुछ प्रमुख कृषि उत्पादों का विवरण दिया गया है:
- धान (Rice): धान भारत की प्रमुख खाद्यान्न फसल है, जिसे मुख्यतः पूर्वी और दक्षिणी राज्यों में उगाया जाता है। भारत दुनिया में धान का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है।
- गेहूं (Wheat): गेहूं भारत की दूसरी प्रमुख फसल है, जो मुख्यतः उत्तर भारत में उगाई जाती है। यह शीतकालीन रबी फसल है, और भारत दुनिया में गेहूं का प्रमुख उत्पादक है।
- दलहन (Pulses): भारत दुनिया का सबसे बड़ा दलहन उत्पादक और उपभोक्ता देश है। चना, अरहर, मूंग, उड़द, मसूर जैसी दालें मुख्यतः मध्य भारत में उगाई जाती हैं।
- तिलहन (Oilseeds): तिलहन फसलों में सरसों, मूंगफली, सूरजमुखी, सोयाबीन आदि शामिल हैं। ये फसलें भारत में खाद्य तेलों के प्रमुख स्रोत हैं।
- कपास (Cotton): कपास भारत की प्रमुख नकदी फसल है, जिसे मुख्यतः महाराष्ट्र, गुजरात, और आंध्र प्रदेश में उगाया जाता है। यह वस्त्र उद्योग के लिए महत्वपूर्ण है।
- चाय और कॉफी (Tea and Coffee): भारत में चाय और कॉफी के बागान मुख्यतः असम, पश्चिम बंगाल, और दक्षिण भारत में स्थित हैं। भारत दुनिया में चाय का सबसे बड़ा उत्पादक और निर्यातक है।
भारतीय कृषि की चुनौतियाँ:- भारतीय कृषि को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, जो उसके विकास और उत्पादकता को प्रभावित करती हैं। ये चुनौतियाँ निम्नलिखित हैं:
- जलवायु परिवर्तन (Climate Change): जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम में अस्थिरता आई है, जिससे फसलों की उत्पादकता पर प्रभाव पड़ता है। असमय वर्षा, सूखा, बाढ़, और तापमान में उतार-चढ़ाव जैसी समस्याएं कृषि के लिए हानिकारक होती हैं।
- सिंचाई की कमी (Lack of Irrigation): भारत में कई क्षेत्रों में सिंचाई की पर्याप्त सुविधाएं नहीं हैं, जिससे फसलों की उत्पादकता प्रभावित होती है। अधिकांश किसान अब भी वर्षा पर निर्भर रहते हैं।
- छोटे और सीमान्त किसान (Small and Marginal Farmers): अधिकांश भारतीय किसान छोटे और सीमान्त होते हैं, जिनके पास सीमित भूमि और संसाधन होते हैं। वे आधुनिक तकनीक और उन्नत बीजों का उपयोग नहीं कर पाते, जिससे उनकी उत्पादकता कम होती है।
- कृषि शिक्षा और जानकारी की कमी (Lack of Agricultural Education and Information): कई किसानों को उन्नत खेती तकनीकों, फसल प्रबंधन, और बाजार जानकारी का अभाव होता है, जिससे वे अपनी उपज की गुणवत्ता और उत्पादन नहीं बढ़ा पाते।
- कृषि में निवेश की कमी (Lack of Investment in Agriculture): भारतीय कृषि में निवेश की कमी है, जिससे सिंचाई, भंडारण, और बाजार सुविधाओं का अभाव है। किसानों को उचित मूल्य न मिलने के कारण उनकी आय कम होती है।
भारतीय कृषि का विकास और सुधार:- भारतीय कृषि में सुधार के लिए सरकार और अन्य संगठनों द्वारा विभिन्न कदम उठाए जा रहे हैं। इनमें से कुछ प्रमुख सुधार और पहलें निम्नलिखित हैं:
- प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN): यह योजना किसानों को आर्थिक सहायता प्रदान करती है, जिससे वे अपनी खेती के लिए आवश्यक संसाधनों की खरीद कर सकें।
- फसल बीमा योजना (Crop Insurance Scheme): यह योजना किसानों को प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान से बचाने के लिए बीमा कवरेज प्रदान करती है।
- सॉयल हेल्थ कार्ड योजना (Soil Health Card Scheme): इस योजना के तहत किसानों को उनकी भूमि की मिट्टी की गुणवत्ता के बारे में जानकारी प्रदान की जाती है, जिससे वे उचित फसल और उर्वरकों का चयन कर सकें।
- कृषि उत्पादन बाजार समिति (APMC) सुधार: एपीएमसी सुधारों के तहत किसानों को अपनी उपज सीधे बाजार में बेचने की सुविधा मिलती है, जिससे वे बेहतर मूल्य प्राप्त कर सकते हैं।
- कृषि शिक्षा और जागरूकता: किसानों को उन्नत खेती तकनीकों, जैविक खेती, और उर्वरक प्रबंधन के बारे में जागरूक करने के लिए विभिन्न प्रशिक्षण और शिक्षा कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं।
निष्कर्ष
भारतीय कृषि देश की अर्थव्यवस्था और समाज की रीढ़ है। इसे सुदृढ़ करने के लिए किसानों को आधुनिक तकनीक, जानकारी, और संसाधनों की आवश्यकता है। सरकार द्वारा उठाए गए सुधारात्मक कदमों और योजनाओं का सही उपयोग करके भारतीय कृषि को और अधिक उत्पादक और समृद्ध बनाया जा सकता है। “Bihar Board Class 8th Hamari Duniya Chapter 2 Notes” के इस लेख से छात्र न केवल भारतीय कृषि के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं, बल्कि इसके महत्व और चुनौतियों के बारे में भी जागरूक हो सकते हैं।