भारत में अंग्रेजी राज्य की स्थापना – Bihar Board Class 8 History chapter 2 Notes

भारत में अंग्रेजी शासन की स्थापना का इतिहास जटिल और घटनाओं से भरा है। अंग्रेजी ईस्ट इंडिया कंपनी का आगमन, उनके व्यापारिक हित, भारतीय राज्यों की राजनीतिक स्थिति, और उनके द्वारा अपनाई गई नीतियाँ, सभी ने मिलकर अंग्रेजी साम्राज्य की नींव रखी। इस लेख में हम समझेंगे कि कैसे अंग्रेजी राज्य की स्थापना भारत में हुई।

Bihar Board Class 8 Social Science History Chapter 2 Notes के माध्यम से हम इस अध्याय के मुख्य बिंदुओं को समझ सकते हैं और यह जान सकते हैं कि कैसे भारत में अंग्रेजी राज्य की स्थापना ने हमारे देश के इतिहास को हमेशा के लिए बदल दिया।

Bihar Board Class 8 History chapter 2 Notes-भारत में अंग्रेजी राज्य की स्थापना

अंग्रेजी ईस्ट इंडिया कंपनी का आगमन:- अंग्रेजों का भारत आगमन 1600 ई. में हुआ, जब अंग्रेजी ईस्ट इंडिया कंपनी को ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ प्रथम ने व्यापार करने का चार्टर प्रदान किया। शुरुआत में, कंपनी का मुख्य उद्देश्य भारत से मसाले, रेशम, कपड़ा, और अन्य वस्त्रों का व्यापार करना था। इस समय भारत में मुग़ल साम्राज्य का शासन था और व्यापार के लिए पहले से ही कई यूरोपीय कंपनियाँ जैसे पुर्तगाली, डच, और फ्रांसीसी मौजूद थीं।

  • कंपनी का व्यापार से सत्ता तक का सफर: ईस्ट इंडिया कंपनी ने भारत में अपनी व्यापारिक स्थिति मजबूत करने के लिए विभिन्न स्थानों पर कारखाने (फ़ैक्ट्री) स्थापित किए। धीरे-धीरे उन्होंने भारतीय राजनीति में हस्तक्षेप करना शुरू कर दिया। 18वीं सदी में मुग़ल साम्राज्य के पतन और छोटे-छोटे राज्यों के उदय के कारण भारत में राजनीतिक अस्थिरता फैल गई। कंपनी ने इस स्थिति का फायदा उठाया और ‘फूट डालो और राज करो’ की नीति अपनाई।
  • प्लासी का युद्ध (1757): प्लासी का युद्ध भारतीय इतिहास की एक महत्वपूर्ण घटना थी जिसने अंग्रेजों के लिए सत्ता का द्वार खोल दिया। यह युद्ध बंगाल के नवाब सिराजुद्दौला और अंग्रेजों के बीच लड़ा गया था। ईस्ट इंडिया कंपनी के अधिकारी रॉबर्ट क्लाइव ने मीर जाफर, जो सिराजुद्दौला का विश्वासपात्र था, को अपनी ओर कर लिया। इस षड्यंत्र के परिणामस्वरूप सिराजुद्दौला की हार हुई और मीर जाफर को बंगाल का नवाब बना दिया गया। प्लासी की जीत ने अंग्रेजों को बंगाल में शासन करने की नींव दी और यह कंपनी के शासन के विस्तार की पहली सीढ़ी थी।
  • बक्सर का युद्ध (1764): प्लासी के युद्ध के बाद, अंग्रेजों ने अपनी स्थिति को और मजबूत किया। लेकिन बंगाल, अवध, और मुग़ल बादशाह के बीच एक गठबंधन ने अंग्रेजों के बढ़ते प्रभाव का विरोध किया। 1764 में बक्सर के युद्ध में अंग्रेजों का सामना इस गठबंधन से हुआ। इस युद्ध में अंग्रेजों की विजय ने उनके राजनीतिक और सैन्य शक्ति को और अधिक सुदृढ़ किया। इस जीत के बाद 1765 में अंग्रेजों ने बंगाल, बिहार, और उड़ीसा की दीवानी (राजस्व संग्रह का अधिकार) प्राप्त कर ली, जिससे उन्हें सीधे प्रशासन और राजस्व संग्रह का अधिकार मिला।

कंपनी का शासन और नीतियाँ:- ईस्ट इंडिया कंपनी ने सत्ता हासिल करने के बाद अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए कई नीतियाँ अपनाईं। कुछ प्रमुख नीतियाँ निम्नलिखित हैं:

  • सहायक संधि प्रणाली (Subsidiary Alliance): लॉर्ड वेलेजली ने इस नीति को अपनाया जिसमें भारतीय रियासतों को अंग्रेजों की अधीनता स्वीकार करनी पड़ती थी। इसके तहत, रियासतों को अंग्रेजी सेना की सुरक्षा के लिए अपने राज्य में ब्रिटिश सेना को रखना होता था, जिसके लिए उन्हें खर्च वहन करना पड़ता था। बदले में, रियासतों को अंग्रेजों से सुरक्षा मिलती थी, लेकिन इसके चलते वे अपनी स्वतंत्रता खो बैठते थे।
  • व्यपगत सिद्धांत (Doctrine of Lapse): लॉर्ड डलहौजी ने इस नीति को अपनाया, जिसके अनुसार यदि किसी भारतीय राजा का उत्तराधिकारी नहीं होता था, तो उसके राज्य को अंग्रेजी साम्राज्य में मिला लिया जाता था। इस नीति के तहत सतारा, झाँसी, और अवध जैसे कई राज्य अंग्रेजी शासन में मिला लिए गए।

भारत में अंग्रेजी राज्य का विस्तार:- कंपनी ने अपने साम्राज्य को फैलाने के लिए कई युद्ध और संधियाँ कीं। इसके तहत, मैसूर के चार युद्धों में से तीसरे और चौथे युद्ध (1799) में टीपू सुल्तान की हार हुई और मैसूर अंग्रेजों के अधीन आ गया। इसके बाद मराठों के खिलाफ युद्धों की श्रृंखला शुरू हुई, जिसे अंततः 1818 में मराठों की हार के साथ समाप्त किया गया।

  • अंग्रेजों द्वारा आर्थिक शोषण: अंग्रेजों ने भारत में अपनी सत्ता स्थापित करने के बाद यहां की अर्थव्यवस्था का शोषण शुरू कर दिया। उन्होंने भारत को एक कच्चे माल के स्रोत और तैयार माल के बाजार के रूप में देखा। किसानों पर भारी कर लगाया गया और उन्हें नकदी फसलों की खेती के लिए मजबूर किया गया। इसके परिणामस्वरूप, स्थानीय उद्योग और व्यापार ठप हो गए। भारतीय कारीगरों और बुनकरों को बर्बादी का सामना करना पड़ा, और देश में गरीबी और भुखमरी फैल गई।
  • भारतीय समाज और अंग्रेजी शासन: अंग्रेजों ने भारतीय समाज और उसकी परंपराओं पर भी गहरा प्रभाव डाला। उन्होंने अपने प्रशासनिक और न्यायिक प्रणाली को लागू किया। इसके अलावा, अंग्रेजी शिक्षा का प्रसार किया गया, जिससे एक नया शिक्षित वर्ग उभरा। इस वर्ग ने भारतीय समाज में सुधार लाने और स्वतंत्रता की भावना को जागृत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  • अंग्रेजी शासन के खिलाफ संघर्ष: भारत में अंग्रेजी राज्य की स्थापना के साथ ही विभिन्न क्षेत्रों में विरोध की लहरें उठने लगीं। अंग्रेजों की नीतियों से असंतुष्ट किसानों, सैनिकों, और आम जनता ने कई विद्रोह किए। इनमें से 1857 का विद्रोह सबसे प्रमुख था, जिसे भारत का पहला स्वतंत्रता संग्राम कहा जाता है। यह विद्रोह अंग्रेजी शासन के खिलाफ व्यापक असंतोष का परिणाम था। हालाँकि यह विद्रोह सफल नहीं हुआ, लेकिन इसने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की नींव रखी।

निष्कर्ष

भारत में अंग्रेजी राज्य की स्थापना एक लंबे और जटिल प्रक्रिया का परिणाम थी। व्यापार से शुरू होकर सत्ता पर कब्जा करने की उनकी रणनीतियों, सैन्य बल, कूटनीति और भारतीय समाज की कमजोरियों का लाभ उठाते हुए अंग्रेजों ने यहाँ एक सशक्त साम्राज्य की स्थापना की। उनकी नीतियों ने भारतीय समाज, अर्थव्यवस्था, और राजनीति पर गहरा प्रभाव डाला। हालाँकि अंग्रेजी शासन ने भारत को आधुनिकता की दिशा में कुछ कदम बढ़ाने में मदद की, लेकिन इसका मुख्य उद्देश्य भारत का शोषण और अंग्रेजी साम्राज्य को सुदृढ़ करना था।

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